क्या बिहार में उपेंद्र कुशवाहा के महागठबंधन में जाने के बाद भाजपा घबरायी है?

जेडीयू के नेताओं का कहना है कि जब BJP के नेताओं को मालूम है कि 1995 के बाद कुशवाहा समाज के एक बड़े तबक़े ने कभी भी नीतीश कुमार को छोड़ा नहीं है तब ऐसे समारोह का आयोजन करना कुशवाहा का राजनीतिक भाव बढ़ाना ही है.

पटना: 

बिहार में हर राजनीतिक दल अपने को सालों भर सक्रिय रखता है. चुनाव के मौसम में उनकी सक्रियता बढ़ जाती है. लेकिन शुक्रवार को बिहार भाजपा के नेताओं ने पूर्व संसद और विधायक शकुनी चौधरी का जन्मदिन जिस तरह से बढ़ चढ़ कर मनाया उससे उनके विरोधियों से ज़्यादा उनके सहयोगियों को लगा कि भाजपा पूर्व केंद्रीय मंत्रीउपेन्द्र कुशवाहा के जाने से राजनीतिक रूप से परेशान और घबरायी हुई है. इसपर अधिकारिक रूप से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) या लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के किसी नेता ने प्रतिक्रिया तो नहीं दी लेकिन दबी ज़ुबान से उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा को ऐसे कार्यक्रम के आयोजन की आवश्‍यकता नहीं थी.

हालांकि शकुनी चौधरी के बेटे सम्राट चौधरी ख़ुद भाजपा में हैं और खगड़िया सीट से एनडीए के उम्मीदवार बनना चाहते हैं लेकिन पिता पुत्र की राजनीतिक दास्तान यही रही है कि पिछले कई चुनावों से शकुनि चौधरी राजनीति के नौसिखियों से न केवल हारे हैं बल्कि कुशवाहा समाज में भी उनका प्रभाव काफ़ी सीमित रहा है. अपने बेटे सम्राट चौधरी की सदस्यता बचाने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कई बार गुहार भी लगायी.

 

जेडीयू के नेताओं का कहना है कि जब BJP के नेताओं को मालूम है कि 1995 के बाद कुशवाहा समाज के एक बड़े तबक़े ने कभी भी नीतीश कुमार को छोड़ा नहीं है तब ऐसे समारोह का आयोजन करना एक प्रकार से उपेंद्र कुशवाहा का राजनीतिक भाव बढ़ाना ही है. वहीं BJP के नेताओं का कहना है कि हर दल को अपने तरीक़े से समाज के हर जाति और वर्ग को जोड़ने का प्रयास करने का हक है और BJP ने भी ऐसा किया. हमारा लक्ष्य उपेंद्र कुशवाहा को कमज़ोर करना है और आगामी चुनाव में उन्हें उनकी राजनीतिक औक़ात दिखानी है.

Link – https://khabar.ndtv.com/news/lok-sabha-elections-2019/is-bjp-upset-after-upendra-kushwahas-induction-in-mahagathbandhan-in-bihar-1973201

 

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