About Party

About Party

The Rashtriya Lok Samta Party (RLSP) is a state party of Bihar with a comprehensive organizational base in 20 states of India. The Party is a part of the United Progressive Alliance (UPA), led under the leadership of Honourable Rahul Gandhi. The Party contested the Lok Sabha Election of 2014 on three seats in Bihar. Surprising everybody, it won all the three seats allotted to it as a part of the NDA alliance. The National President of the Party, Shri Upendra Kushwaha is the former Union Minister of State for Human Resource Development.

With the slogan of ‘Jai Kisan, Jai Naujawan’ the RLSP was launched on 3rd March, 2013. The party believes in socialist principles and the ideals of a democratic society. The party is credited to introduce ‘Policy Based Politics’ in Bihar. The focus of the party has been to reform the education and youth based policies. The Party is constantly working to reform the education system and has been able to launch a strong social movement to reform education. With the renowned educationist Shri Upendra Kushwaha accepting the role of the union Minister of State for human Resource and Development, the movement to reform education policy has gained a great momentum. The vision document of the party is entirely based on development policies of the society.

The Party was an outcome of the strong social movement launched by the marginalized communities in Bihar to challenge the authoritarian regime. A non-political organization named ‘Bihar Nav Nirman Manch’ was constituted in June, 2011 by social leaders and reformers of Bihar. The founders of the organization were several leaders from marginalized communities in Bihar including Shri Upendra Kushwaha, Mangni Lal Mandal, Shankar Jha Azad, Dr. Latuf-ur- Rehman, besides others. Shri Upendra Kushwaha was unanimously chosen as the Convenor of the organization.

After the success of the movement, members of the core committee of the organization decided to launch a political party. Subsequently, Shri Upendra Kushwaha resigned from the Membership of the Rajya Sabha and JD(U) as well. Following his resignation, a state level Rally was organized in Gandhi Maidan of Patna on 3rd March, 2013. Launch of a political party named Rashtriya Lok Samta Party (RLSP) with the motto of ‘Jai Kisan, Jai Naujawan’ was declared in the Rally. Shri Upendra Kushwaha was declared as the National President of the Party and the flag of the Party with Blue, Green and White colours was released.

Deriving inspiration from heroes of the Freedom Struggle and the Socialist Movement, the RLSP is constantly working for the development of the society, with ever-increasing power.

पार्टी के बारे में

राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) बिहार आधारित पार्टी है जिसका भारत के 20 राज्यों में व्यापक संगठनात्मक आधार है. पार्टी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का हिस्सा है,  जिसका नेतृत्व माननीय राहुल गाँधी कर रहे हैं. पार्टी ने बिहार में तीन सीटों पर 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ा था. सभी को आश्चर्यचकित करते हुए, एनडीए गठबंधन के हिस्से के रूप में आवंटित तीनों सीटों पर जीत दर्ज की. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा केंद्र सरकार में पूर्व मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रह चुकें हैं.

‘जय किसान, जय नौजवान’ नारे के साथ 3 मार्च 2013 को आरएलएसपी की स्थापना की गयी थी . पार्टी समाजवादी सिद्धांतों और लोकतांत्रिक समाज के आदर्शों में विश्वास करती है. पार्टी को बिहार में ‘नीति आधारित राजनीति’ प्रारंभ करने का श्रेय दिया जाता है. पार्टी का जोर शिक्षा और युवाओं की नीतियों में सुधार लाने पर रहा है. पार्टी शिक्षा पव्यवस्था में सुधार के लिए निरंतर कार्य कर रही है और इसे शिक्षा सुधार के लिए एक मजबूत सामाजिक आंदोलन शुरू करने का श्रेय दिया जाता है. प्रसिद्ध शिक्षाविद उपेंद्र कुशवाहा के केंद्र सरकार में  मानव संसाधन और विकास राज्य मंत्री का दायित्व स्वीकार करने से शिक्षा सुधार आंदोलन को गति और बल मिला है. पार्टी का दृष्टि पत्र (विज़न डॉक्यूमेंट) पूर्ण रूप से समाज के विकास नीतियों पर आधारित है.

पार्टी की स्थापना बिहार के तानाशाही शासन को चुनौती देने के लिए वंचित समुदायों द्वारा शुरू की गई मजबूत सामाजिक आंदोलन के परिणामस्वरूप हुई. बिहार के तानाशाही शासन को चुनौती देने के लिए, ‘बिहार नव निर्माण मंच’ नामक एक गैर-राजनीतिक संगठन का जून, 2011 में गठन किया गया. संगठन का नेतृत्व बिहार के पिछड़े वर्गो और वंचित समुदायों से आए सामाजिक नेता कर रहे थे. संगठन की स्थापना उपेंद्र कुशवाहा, मंगनी लाल मंडल, शंकर झा आजाद, डॉ लातुफ-उर- रहमान सहित अन्य कई नेताओं ने की. उपेंद्र कुशवाहा को सर्वसम्मति से संगठन के संयोजक के रूप में चुना गया.

आंदोलन की सफलता के बाद, संगठन की कोर कमेटी के सदस्यों ने एक राजनीतिक पार्टी शुरू करने का फैसला किया. इसके बाद, उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा और जद(यू) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफे के बाद, 3 मार्च 2013 को पटना के गांधी मैदान में एक राज्य स्तरीय रैली का आयोजन करने का फैसला किया गया. रैली में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) नाम की एक राजनीतिक पार्टी का शुभारंभ ‘जय किसान, जय नौजवान’ के नारे के साथ करने की घोषणा हुई. उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया और नीला, हरा और सफेद रंगों के साथ पार्टी का झंडा जारी किया गया.

स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी आंदोलन के नायकों से प्रेरणा प्राप्त करते हुए, आरएलएसपी लगातार बढ़ती हुई शक्ति के साथ समाज के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है.

बिहार के तानाशाही शासन को चुनौती देने के लिए, ‘बिहार नव निर्माण मंच’ नामक एक गैर-राजनीतिक संगठन काजून, 2011 में गठन किया गया.संगठन का नेतृत्व बिहार के पिछड़े वर्गो और वंचित समुदायों से आए सामाजिक नेता कर रहे थे.संगठन की स्थापना उपेंद्र कुशवाहा, मंगनी लाल मंडल,शंकर झा आजाद, डॉ लातुफ-उर-रहमान सहित अन्य कई नेताओं ने की.उपेंद्र कुशवाहा को सर्वसम्मति से संगठन के संयोजक के रूप में चुना गया.

स्थापना के पहले दिन से ही संगठन ने खुद को लोक कल्याण के लिए समर्पित कर दिया. तानाशाही,भ्रष्टाचार, लाल-फीताशाही और भाई-भतीजेवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए समाजवाद और सत्याग्रह का मार्ग अपनाने का निर्णय लिया गया.बिहार नव निर्माण मंच ने ‘संकल्प यात्रा’ के साथ अपनी यात्रा शुरू की, जिसने अत्यंत जन समर्थन प्राप्त किया और वंचित समुदायों के लोगों और किसानों ने अपने मुद्दों और समस्याओं को मंच के साथ साझा किया. मंच यात्रा के अनुभवों से आश्चर्यचकित था, जिसमें ज्ञात हुआ कि तत्कालीन शासन का’गुड-गवर्नेंस’ का दावा लफ्फाजी के अलावा कुछ भी नहीं था.

यात्रा के अवलोकनों के आधार पर मंच ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं जिसे सरकार ने अनसुना कर दिया. नतीजतन, मंच ने तानाशाही शासन से लड़ने और लोगों की अंतरात्मा को जगाने के लिए बिहार में एक जन आंदोलन शुरू करने का फैसला किया. लेकिन, संसाधनों और आर्थिक कमी प्रस्तावित आंदोलन के लिए प्रमुख अवरोध थे.हालांकि, कोई भी बाधा मंच के शक्तिशाली नेतृत्व के सामने रोड़ा बनने की शक्ति नहीं रख पाया. एक बिहार व्यापी आंदोलन शुरू किया गया, जिसे विशाल जन समर्थन प्राप्त हुआ. लोगों ने मंच द्वारा उठाए गए मुद्दों को स्वयं से जुड़ा महसूस किया और संगठन को आशावादिता के साथ देखने लगे. लाखों लोग आन्दोलन से जुड़े और मंच के सदस्य बनते चले गए.

आंदोलन के समापन के बाद मंच ने पटना में कार्यकर्ता सम्मलेन करने की योजना बनाई. सम्मलेन में कार्यकर्ताओं का इतना विशाल हुजूम उमड़ा कि श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल जैसा बड़ा सभागार भी छोटा पड़ गया. जितने कार्यकर्ता सभागार के अंदर थे, उससे कहीं ज्यादा बाहर खड़े होकर सम्मलेन का हिस्सा बन रहे थे. सम्मलेन की सफलता ने मंच को नयी उर्जा और उत्साह प्रदान किया. सम्मलेन में कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में मंच के बैनर के तहत एक राजनीतिक दल की शुरूआत करने की मांग को उठाया. हालांकि, नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं की मांग को टाल दिया.

मंच की सफलता, कार्यकर्ताओं का उत्साह और विशाल जन समर्थन के कारण मंच पर एक राजनीतिक दल बनाने का लगातार दबाव बन रहा था. संगठन और इससे संबंधित आंदोलन के भविष्य के बारे में चर्चा करने के लिए मंच ने अप्रैल, 2012 में बोधगया में ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन करने का निर्णय लिया, जिसमें संगठन की नीतियों और भविष्य के बारे में मंथन करने की योजना बनायी जानी थी. शिविर के कई विचारों और निष्कर्षों में से, एक राजनीतिक पार्टी की शुरुआत करना कार्यकर्ताओं द्वारा उठाए गए प्रमुख मांग के रूप में उभरा.

चिंतन शिविर में पारित संकल्प पत्र ने संगठन के भविष्य का मार्ग प्रदर्शित किया.संगठन ने भविष्य में काम करने के लिए निम्न प्रमुख मुद्दे तय किये- तानाशाही शासन के खिलाफ युद्ध, भ्रष्टाचार और सरकार की अक्षमता के खिलाफ लड़ाई, पिछड़े वर्गों को मुख्य धारामें लाने के लिए न केवल सामाजिक, बल्कि राजनीतिक रूप से कार्य करना. इस तरह से संगठन में राजनीतिक आयाम जुड़ गया. अतः, एक मजबूत राजनीतिक दल के गठन का निर्णय लिया गया. हालांकि, राजनीतिक दल को शुरू करने के रास्ते में एक बड़ा खतरा था.
इस बीच, मंच ने दिल्ली के मालवंकर हॉल में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करने का फैसला किया. संगोष्ठी सफल रही. परन्तु, मंच को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा क्योंकि कुछ नेताओं ने संसद की सदस्यता जाने के डर से संगठन से खुद को अलग कर लिया.मंच इससे प्रभावित तो हुआ, लेकिन इसका मुख्य नेतृत्व बिल्कुल भी निराश नहीं हुआ. संगठन के संयोजक, उपेंद्र कुशवाहा राज्य सभा के एकमात्र सांसद थे. वह जद(यू) पार्टी से जुड़े थे और संसद के सदस्य के रूप में उनके कार्यकाल में लगभग चार साल बचे थे.

संगठन की कोर कमेटी के सदस्यों ने एक राजनीतिक पार्टी शुरू करने का फैसला किया. इसके बाद, उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा और जद(यू) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. अपने इस्तीफे के बाद, 3 मार्च 2013 को पटना के गांधी मैदान में एक राज्य स्तरीय रैली का आयोजन करने का फैसला किया गया. रैली ऐतिहासिक रूप से सफल हुई. इसी रैली में लाखों के भीड़ के समक्ष आगे का सफ़र राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के साथ तय करने का निर्णय लिया गया. जिस दल कि स्थापना जय किसान जय नौजवान नारे के साथ हुई . उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया और नीला, हरा और सफेद रंगों के साथ पार्टी का झंडा जारी किया गया.

पार्टी की घोषणा के बाद राजगीर (नालंदा) में एक चिंतन सह प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया. सात सूत्री दृष्टि पत्र कार्यकर्ताओं को दिया गया और उन्हें शासन की तानाशाही के खिलाफ लड़ने और संगठनात्मक आधार का विस्तार करने के लिए कहा गया.

पार्टी 2014 के लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का एक हिस्सा बन गई और बिहार में तीन सीटों पर चुनाव लड़ी. पार्टी ने तीनों सीटों पर जीत हासिल करके भारत में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी. अपनी सफलता के बाद, पार्टी ने झारखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर पूर्वी राज्यों में अपना संगठनिक आधार बढ़ाया.

पार्टी के सामने आने वाली बड़ी मुश्किलों और कठिनाइयों के बावजूद पार्टी लगातार बिहार और राष्ट्र को विकसित करने के लिए लड़ रही है. स्वतंत्रता संग्राम और समाजवादी आंदोलन के नायकों से प्रेरणा प्राप्त करते हुए, आरएलएसपी लगातार बढ़ती हुई शक्ति के साथ समाज के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है.

Call Now